भीखमंगे पर रिसर्च

"ओ, हेलो...!!"
लड़की करीब आकर "अच्छा तो तुम मंदिर भी आते हो ?"
"क्यों नहीं आना चाहिए ?"
"नहीं ऐसा तो नहीं है लेकिन मैं यह सोच कर आश्चर्य चकित हूं कि आखिर तुम जैसा सनकी आदमी मंदिर आकर भगवान से मांगता क्या होगा ?"
"तुम्हें क्या लगता है ?"
"लगना क्या है ? कुछ उल्टा पुल्टा डिमांड होगा और साथ में शिकायत की पोटली..."
"गलत"
"मैं कुछ समझी नहीं।"
"अच्छा यह बताओ कि मंदिर के बाहर जो लोग भीख मांग रहे हैं, उसके पीछे क्या कारण हो सकता है ?"
"क्योंकि वह लाचार हैं।"
"फिर गलत।"
"मतलब"
"मतलब यह कि जिस दिन आम आदमी पूरी तरह भीख देना बंद कर देगा, उस दिन के बाद कोई भी कितना भी लाचार हो जाए, वह भीख नहीं मांगेगा और उससे भी महत्त्वपूर्ण बात यह है कि तुम इन भीखमंगों को कितना भी पैसा क्यों नहीं दे दो, यह लोग भीख मांगना नहीं छोड़ेंगे।"
"ओ..., तो अब तुम भीखमंगे पर रिसर्च करने लगे हो। इसलिए मंदिर आए हो..."
"नहीं, मैं मंदिर आकर उन सम्मानित भिखमंगों की झलक देखने आता हूं, जो वीआईपी लाइन में बाबा को मोटा दक्षिणा देकर अपने मुराद के पूरी होने की मन्नत मांगते हैं। राहु और शनि से मुक्ति मार्ग की तलाश में धार्मिक अनुष्ठानों के आयोजन करने आते हैं।अपने धन बल से ईश्वर को प्रभावित करने आते हैं।"
"मेरा मजाक बना रहे हो।"
"जब खुद की जिंदगी मजाक बना पड़ा हो तो ऐसे लोगों को मजाक करने की इजाजत नहीं होती है।"
"उफ्फ !! तुम्हें हिमालय पर्वत से कूद कर सीधे यमराज के साथ हो जाना चाहिए।"
लड़का हंसने लगता है। "देखो यार, मैं तो ईश्वर से सिर्फ वही मांगने आता हूं जो मेरे भाग्य में है। मैं ईश्वर से यह मन्नत भी मांगता हूं कि मेरे मन में कोई भी ऐसा ख्वाइश भी उत्पन्न नहीं हो, जो मेरे भाग्य में नहीं है।"

Comments

Popular posts from this blog

२. मजबूर और मजबूत