भाग १ .लालच का दवाब

 

*लालच का दवाब ?? (कहानी)*

✍🏽 *बिपिन कुमार चौधरी*

हेलो! क्या मैं यहां बैठ सकती हूं...
गांधी मैदान मेरे बाप का नहीं है।
लड़की बैठते हुए, क्या नाम है तुम्हारा..
नाम में क्या रखा है ?  काम की बात कीजिए।
काफी एटीट्यूड है।
मैडम गांव का गंवार हूं, देशी गालियां सह नहीं पाओगी।
उफ, चलो बताओ, काम क्या करते हो ?
खबरें तलाशता हूं ?
शक्ल से तो नहीं लगता ?
खबर तलाशने के लिए शक्ल नहीं अक्ल की जरूरत होती है।
मतलब खुद को अक्लमंद समझते हो ?
नहीं, क्योंकि ऐसा दुनियां को नहीं लगता।
कैसी खबरें लिखते हो ?
नफरत वाली खबरें। ऐसी खबर जो सड़ी गली सिस्टम और बईमान नेताओं, हाकीमों और बाबुओं की काली करतूत सामने लाकर लोगों को उनसे नफरत करने को मजबूर कर दे। अफसोस ऐसी खबरें अखबार के संपादकों को पसंद नहीं आती है।
फिर भी काफी चर्चे हैं तुम्हारे...

पहली बार लड़के ने सर उठा कर उस लड़की को देखा था। अत्यंत ही साधारण कपड़े में गांधी मैदान के किनारे कड़कड़ाती धूप में एक पत्थर पर बैठा वह लड़का उसकी इस जवाब से खुश होने की जगह काफी चौंक गया था।

क्या नाम है तुम्हारा ?
नाम में क्या रखा है, सर ! काम की बात कीजिए ?
क्या करती हो ?
अक्लमंद लोगों की तलाश।
मुझे कैसे जानती हो ?
कहा न, काफी चर्चे हैं तुम्हारे।
चर्चा से खर्चा नहीं चलता है।
इसी अकड़ के कारण यूं भटक रहे हो।
तो क्या करूं...
थोड़ा अदब सिख लो और थोड़ी होशियारी...
मतलब ?
इतने बेवकूफ भी तुम नहीं हो।
तो लोगों के हां में हां मिलाकर जी हजूरी करूं।
शायद...
यह पत्रकारिता नहीं चमचागिरी है।
और तुम जिस तरह लिखना चाहते हो, वह आत्महत्या है।
मैं गरीब हूं, शायद लोग इसलिए मुझ पर ज्यादा दवाब डालते हैं।
कैसा दवाब है तुम्हारे ऊपर ?
तुम कहना क्या चाहती हो...
वही जो तुम समझना नहीं चाहते हो..
मतलब रोजी रोटी के लिए कलम को गिरवी रखकर गुलामी करूं...
मैंने ऐसा कब कहा लेकिन...
क्या लेकिन ?
तुम्हें सिर्फ अपनी रोजी रोटी की फिक्र है लेकिन कभी उस मालिक, प्रोड्यूसर और संपादक के बारे में सोचा है, जो दिन रात अखबार और चैनल चलाने के लिए चिंतित रहते हैं। तुम्हें तो शायद यह भी नहीं मालूम होगा कि सरकारी और गैर सरकारी विज्ञापनों के लिए उन्हें किस प्रकार की जी हजूरी और जुगाड़ करनी पड़ती है ?
लड़का को अचानक से एक जबरदस्त झटका लगा। कहने का मतलब सभी दवाब में हैं..
इसका मुझे आइडिया नहीं लेकिन आजकल अन्य बातों की अपेक्षा सबसे ज्यादा लालच का दवाब तो सब पर है।
कुछ देर दोनों चुप रहते हैं।
फिर लड़की अचानक से खड़ी होकर बोलती है। मुझे लेट हो रहा है, चलती हूं...
नाम तो बताओ ...?
नाम में क्या रखा है ?
उफ्फ !!!!!!
हां, काम की बात यह है कि खबरें खूब तलाशो लेकिन अपनी भी खबर रखा करों नहीं तो तुम्हारी खबर लेने वाला यहां कोई नहीं होगा...


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