२. मजबूर और मजबूत

*मजबूर और मजबूत*

✍🏽 *बिपिन कुमार चौधरी*

हेलो!!
"मिस्टर चौधरी।"
"जी बोलिए..।"
"बड़ी ऊंची छलांग मार रहे हो।"
"मतलब"
"लेटर राइटिंग से सीधे व्यंग्य लेखक बन गए।"
"बड़ी सख्त निगरानी कर रही मेरी, मैडम!!"
"ओ हेलो..., सुमन के पास ढेरों काम हैं।"
"तो सुमन नाम है आपका।"
"शालिनी सुमन, एक हिडेन प्रोजेक्ट पर काम कर रही हूं।"
"मैंने पूछा क्या ? आप कुछ भी करो।"
"यार तुम वाकई गंवार हो, वह भी देशी। अगर सीधे मुंह थोड़ी देर बात कर लोगे तो तुम्हारे इस दो टके के थोबड़े का भाव नहीं गिर जायेगा।"
"एक्सक्यूज मी मैडम, अपनी हद में रहो।"
"नहीं तो क्या करोगे। गालियां दोगे.."
लड़का चुप रहता है।
"अरे तो दो गालियां, मैं भी तो देखूं दो टके के थोबड़े वाले युवा एंग्री रिपोर्टर का असली रूप..."
"देखो मुझे डिस्टर्ब मत करो।"
"आखिर तुम समझते क्या हो खुद को ?"
दोनों के बीच इस गर्मागर्म बहस ने अचानक सभी का ध्यान उस कोने की ओर खींच लिया, जहां दोनों एक दूसरे बिना मतलब झगड़ रहे थे। तभी प्रेस दिवस के अवसर पर पटना म्यूजियम के सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का आगमन हो जाता है।
सभी लोग उनके स्वागत के लिए दौड़ पड़ते हैं।
कार्यक्रम समाप्त होते ही लड़का तेजी से निकलने का प्रयास करता है लेकिन वही लड़की एक बार फिर रास्ता रोक लेती है। 
"कहां चले खड़ूस।"
"मुझे जाने दो, लेट हो रहा है।"
"नाश्ता का पैकेट तो ठूंस लो।"
"देखो तुम अपनी हद पार कर रही हो।"
लड़की खिलखिला कर हंसती है और उसके हाथों में नाश्ता का पैकेट थमाते हुए बोलती है "यह जिंदगी है, सुकून से जीना सीखो। तेरे जैसे यहां कितने तीस मार खां आए और चले गए।"
लड़का पैकेट ले लेता है।
तभी उसकी एक सहेली ने पीछे से कान में बुदबुदाया "धीरे धीरे जगह पर आ रहा है।"
लड़के ने यह बात सुन लिया। गुस्से में बोला "ओ हेलो मैडम! किसान का बेटा हूं, भोजन की कद्र करता हूं। कोई दूसरी मतलब मत निकालना।"
लड़की अपनी सहेली को मुंह बंद करने का इशारा करती है।
दोनों हॉल से बाहर निकलकर एक पेड़ के नीचे मखमली घासों पर बैठ कर नाश्ता करने लगते हैं।
इस दौरान दोनों बिल्कुल चुप रहते हैं।
नाश्ता समाप्त होते ही लड़की पूछती है "अब कहां का प्रोग्राम है, चौधरी जी ?"
"कृष्ण मेमोरियल हॉल"
"किसी मोटरसाइकिल वाले पत्रकार साथी से दोस्ती क्यों नहीं कर लेते। कब तक पटना की सड़को पर दिन रात पैदल ही खाक छानते फिरोगे।"
"जब तक अपनी मोटर साईकिल नहीं ले लूं।"
"अरे यार! मैं कौन सा तुम्हें किसी की गाड़ी छीनने बोल रहा हूं। साथ रहोगे तो शरीर को भी आराम मिलेगा और काम भी बेहतर कर पाओगे और हो सकता है जल्द ही अपनी मोटर साईकिल भी खरीद लो।"
"बड़ी हमदर्दी हो रही है।"
"गांव का गंवार हो, अपनी हद में रहो।"
"शुरू मैंने नहीं किया था।"
"यार तुमसे बात करना भी मुश्किल काम है।"
"तो मत करो"
"कभी कभी कुछ बातें ठंडे दिमाग से भी सुन लेना चाहिए।"
"इस शहर में मेरी कहां कोई सुनता है!!"
"अगर बिना सुने तुम्हें इतना छाप रहे हैं तो फिर सोचो जब सुनने लगेंगे तो कितना मजा आयेगा।"
लड़का चुप रहता है।
"तुम्हारे में हुनर है लेकिन हीरे की पहचान जौहरी करता है। अपने गुस्सा को नियंत्रित रखो नहीं तो यह दुनियां तुम्हें जौहरी तक पहुंचने नहीं देगा।"
"मेरे पास ऐसे भी समय कम है।"
"तुम्हें थोड़ा पेसेंस के साथ कार्य करना होगा।"
"तब तक सब खत्म हो जाएगा।"
"याद रखो इस दुनियां में हर अच्छी चीज की ऊंची कीमत है लेकिन उस चीज को सही जगह पहुंचना जरूरी है।"
"जैसे किसानों का अनाज"
"शायद सही पकड़े हो।"
"ठीक है, मैं अब जा रही हूं। लेकिन याद रखना मजबूर आदमी की संपत्ति निलाम होती है और मजबूत आदमी दुनियां से तौल मोल करता है।"

*क्रमशः...*




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