४.अरमानों का बोझ
*अरमानों का बोझ*
✍🏽 *बिपिन कुमार चौधरी*
"ऑटो.."
ऑटो वाला रुकते हुए "जी मैडम"
"बोरिंग रोड चलोगे"
"जी बैठिए"
बैठते ही "अरे चौधरी तू"
"पीछा कर रही हो।"
"अबे जा, आइने में चेहरा देखा है।"
"इतनी फुरसत किसे है ?"
"बात तो सही है, पूरी दुनियां की यही प्राब्लम है।"
"मैं समझा नहीं।"
"हां जी, कहां से समझोगे, गांव के गंवार जो ठहरे।"
"यार तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है।"
"यही कि इस दुनियां में हर किसी को दूसरे की कमी दिखती है लेकिन अपनी नहीं।"
"अभी यह बोलने का मतलब।"
"पूरी दुनियां को लिख लिख कर आइना दिखाने की ख्वाइश रखने वाले अक्लमंद आदमी के पास भी खुद अपना चेहरा देखने का वक्त नहीं है।"
लड़का गुस्से से तिलमिला जाता है लेकिन इसके बाद दोनों बहुत देर तक चुप रहते हैं।
कुछ देर बाद लड़का अचानक एक छोटे उम्र के बच्चे की ओर इशारा करते हुए कहता है "उस बच्चे को देख रही हो।"
"हां, वही जो भीख मांग रहा है।"
"क्या गलती है उसकी ?"
"घर में कोई कमाने वाला नहीं होगा।"
"ऐसे घर वालों को पैदा करने की फुरसत कैसे मिल जाता है ?"
"क्या बेहूदा मजाक है ?
"चिल्लाओं मत, उस लड़के के साथ जो इस दुनियां वाले ने बेहूदा मजाक किया है, उसके लिए यह अबोध बालक दुनियां के किस आईने में अपनी कौन सी गलती देखे ?"
"शायद इनके मां बाप नहीं भी हो सकते हैं !!!"
"ए टेंपो रोको!" लड़का उस भीख मांगने वाले बच्चे को गोद में उठा कर ऑटो में ले आता है।
"भैया मुझे किडनैप करके कुछ नहीं मिलेगा। मैं खुद भीख मांगता हूं।"
"मेरे लिए भीख तो मांगेगा।"
"फिर मां तो भूखे मर जाएगी।"
"क्यों तेरा बाप कुछ नहीं करता।"
"बापू तो खुद शराब पीने के लिए मेरे पैसे छीन लेते हैं और अगर मां मना करती है तो उसके बाल पकड़ कर उसे खूब पीटते हैं।"
"तुम उसे नहीं रोकते हो।"
"रोकता हूं। पूरी ताकत से रोकता हूं लेकिन मैं अभी बच्चा हूं इसलिए वह मुझे भी पीट देते हैं।"
"आस पास से कोई रोकने नहीं आता है।"
"आज तक तो कोई नहीं आया, सब देख कर मजे लेते हैं लेकिन मैं बहादुर हूं। खुद अपने आंसू पोछकर मां का आंसू पोछता हूं, और उसे बोलता हूं तूं मत रो मां मैं फिर भीख मांग कर तेरे हाथों में ढेर सारा पैसा लाकर दूंगा।"
"ऐसा कब तक चलेगा ? जब तक मैं बड़ा होकर फैक्ट्री में काम करने के लायक नहीं हो जाऊं। फिर जब बड़ा हो जाऊंगा तो बापू को भी खूब मजा सिखाऊंगा।"
तब तक बोरिंग रोड आ जाता है। सभी उतर जाते हैं। लड़का अपनी पैकेट से दस रुपया देता है। लडकी भी बच्चे के हाथ में सौ रुपए का एक नोट देती है।
लेकिन उन दोनों के साथ एक अजीब वाकया होता है। ऑटो वाला दोनों से किराए लेने से इंकार कर देता है और लड़का से पूछता है "एक गरीब भीखमंगे बच्चे से आपकी इतनी हमदर्दी क्यों है ?"
"दोस्त ! जो दर्द में होता है, उसे ही दूसरे का दर्द समझ में आता है।"
तभी पीछे ट्रैफिक पुलिस को आता देख ऑटो वाला आगे निकल जाता है।
"यार सारे भीख मांगने वाले बच्चों के बाप ऐसे नहीं होते हैं।"
"जिनके भी होते हैं, उसका जिम्मेदार कौन है और उसे क्या सजा मिलती है ?"
"तुम चाहते क्या हो ?"
"न्याय ...!"
"कैसा न्याय ?"
"जिस न्याय में देश के सभी बच्चों के सुरक्षित बचपन की गारंटी हो।"
"यह कैसे संभव है ?"
"यह उन लोगों को तय करना चाहिए जो किसी बच्चे को इस जालिम दुनियां में लाना चाहते हैं।"
"सभी परिवार की आर्थिक स्थिति एक जैसी नहीं होती है।"
"फिर प्रत्येक बच्चे से एक जैसे परीक्षा में अधिक से अधिक अंक लाने की उम्मीद उसके मां बाप द्वारा क्यों की जाती है।"
"तुम खुद भी पागल हो और मुझे भी पागल कर दोगे।"
लड़का लोट पोट होकर हंसते हुए, "मैंने तुम्हें आइना दिखाने की कोशिश की लेकिन तुम्हें दिखा क्या मेरा पागलपन...।"
"क्या दिखाना चाहते हो तुम ?"
"यही कि लोग अपने गंदे और वाहियात सोच के पागलपन में कहीं वारिस की तलाश में बच्चियों की भ्रूण हत्या कर रहे हैं। कहीं दहेज के डर से बाप लड़की को बीमार होने पर मरने छोड़ देता है। कहीं अपनी गलत आदतों के लिए बच्चे का बचपन कुर्बान कर दिया जाता है तो कहीं अपनी अपेक्षाओं के बोझ तले लड़का खुद के घर में और लड़की ससुराल वालों के घर में घुट घुट कर जीने को विवश है, और कोई भी इसका दोष लेने को तैयार नहीं और उससे भी बड़ी बात तो यह है कि ये लोग कोई गैर नहीं, हमारे अपने होते हैं। इस देश के हर गांव शहर की गलियों में एक दर्दनाक कहानी है, जिसके जिम्मेदार हमारे अपने ही लोग हैं।"
"कोई भी मां बाप अपने बच्चे के लिए बुरा नहीं सोच सकता है ?"
"फिर देश में भ्रूण हत्या कौन करता या करवाता है ? एक बच्चे की नैसर्गिक प्रतिभा अंको के मगजमारी में क्यों दम तोड़ देता है ? आखिर किस अधिकार से एक बच्चे को जीवन देकर सड़कों पर भीख मांगने या बाल मजदूरी के लिए छोड़ दिया जाता है ?"
"सवाल कठिन हैं, लेकिन इंसानी फितरत के पागलपन को कौन रोक सकता है ?"
दोनों राष्ट्रीय सहारा के रिसेप्शन के सामने लगे सोफे पर विराज चुके होते हैं। लड़का हंस कर डायरी निकाल कर कुछ लिखने लगता है।
"तुम्हारे लेखनी के आईने में सवाल बहुत कठिन होते हैं ?"
"शायद, जिंदगी के ऐसे ही कठिन डगर पर चलना अधिकांश लोगों के जीवन की नियति है...।"
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